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शुक्रवार, 22 जून 2012

अपनी तो जैसे-तैसे - Apni To Jaise Taise (Kishore Kumar, Laawaris)



Movie/Album: लावारिस (1981)
Music By: कल्याणजी-आनंदजी
Lyrics By: आनंद बक्षी
Performed By: किशोर कुमार

अपनी तो जैसे-तैसे, थोड़ी ऐसे या वैसे
कट जाएगी
आपका क्या होगा जनाब-ए-आली
आपका क्या होगा
अपने आगे ना पीछे, ना कोई ऊपर-नीचे
रोने वाला
ना कोई रोने वाली जनाब-ए-आली
आपका क्या होगा

आप भी मेरी तरह इन्सान की औलाद हैं
आप मुँह माँगी दुआ, हम अनसुनी फ़रियाद हैं
वो जिन्हें सारा ज़माना समझे लावारिस यहाँ
आप जैसे ज़ालिमों के ज़ुल्म की ही ईजाद हैं
गाली हज़ूर की तो, लगती दुआओं जैसी
हम दुआ भी दें तो लगे है गाली
आपका क्या होगा...

आपके माथे से छलके जो पसीना भी कहीं
आसमाँ हिलने लगे और काँप उट्ठे ये ज़मीं
आपका तो ये पसीना ख़ून से भी क़ीमती
और अपने ख़ून की क़ीमत यहाँ कुछ भी नहीं
अपना तो ख़ून पानी, जीना-मरना बेमानी
वक़्त की हर अदा है अपनी देखी-भाली
आपका क्या होगा...

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सोमवार, 18 जून 2012

मेरे अंगने में - Mere Angne Mein (Amitabh Bachchan)



Movie/Album: लावारिस (1981)
Music By: कल्याणजी-आनंदजी
Lyrics By: आनंद बक्षी
Performed By: अमिताभ बच्चन, अलका याग्निक

मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है
जो है नाम वाला वही तो बदनाम है
मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है

जिसकी बीवी लम्बी उसका भी बड़ा नाम है
कोठे से लगा दो सीढ़ी का क्या काम है
मेरे अंगने में...

जिसकी बीवी मोटी उसका भी बड़ा नाम है
बिस्तर पे लिटा दो गद्दे का क्या काम है
मेरे अंगने में...

जिसकी बीवी काली उसका भी बड़ा नाम है
आँखों में बसा लो सुरमे का क्या काम है
मेरे अंगने में...

जिसकी बीवी गोरी उसका भी बड़ा नाम है
कमरे में बिठा लो बिजली का क्या काम है
मेरे अंगने में...

जिसकी बीवी छोटी उसका भी बड़ा नाम है
गोद में बिठा लो बच्चे का क्या काम है
मेरे अंगने में...

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रविवार, 17 जून 2012

कबके बिछड़े हुए - Kabke Bichhde Hue (Kishore Kumar, Asha Bhosle)



Movie/Album: लावारिस (1981)
Music By: कल्याणजी-आनंदजी
Lyrics By: अनजान
Performed By: किशोर कुमार, आशा भोंसले

कबके बिछड़े हुए हम आज कहाँ आ के मिले
जैसे शम्मा से कहीं लौ ये झिलमिला के मिले
कबके बिछड़े हुए...
जैसे सावन से कहीं प्यासी घटा छा के मिले
कबके बिछड़े हुए...

बाद मुद्दत के रात महकी है
दिल धड़कता है साँस बहकी है
प्यार छलका है प्यासी आँखों से
सुर्ख़ होंठों पे आग दहकी है
महकी हवाओं में, बहकी फ़िज़ाओं में, दो प्यासे दिल यूँ मिले
जैसे मयकश कोई साक़ी से डगमगा के मिले
कबके बिछड़े हुए...

दूर शहनाई गीत गाती है
दिल के तारों को छेड़ जाती है
यूँ सपनों के फूल यहाँ खिलते हैं
यूँ दुआ दिल की रंग लाती है
बरसों के बेगाने, उल्फ़त के दीवाने, अनजाने ऐसे मिले
जैसे मनचाही दुआ बरसों आजमा के मिले
कबके बिछड़े हुए...

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