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शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

आज सोचा तो आंसू भर आए - Aaj Socha To Aansoo Bhar Aaye (Lata Mangeshkar)



Movie/Album: हँसते ज़ख्म (1973)
Music By: मदन मोहन
Lyrics By: कैफी आज़मी
Performed By: लता मंगेशकर

आज सोचा तो आंसू भर आए
मुद्दतें हों गई मुस्कुराये

हर कदम पर उधर मुड़कर देखा
उनकी महफिल से हम उठ तो आए
आज सोचा तो आंसू...

रह गई ज़िन्दगी दर्द बन के
दर्द दिल में छुपाये छुपाये
आज सोचा तो आंसू...

दिल की नाज़ुक रगें टूटती हैं
याद इतना भी कोई न आए
आज सोचा तो आंसू...

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गुरुवार, 8 नवंबर 2012

ये माना मेरी जाँ - Ye Maana Meri Jaan (Md.Rafi)



Movie/Album: हँसते ज़ख्म (1973)
Music By: मदन मोहन
Lyrics By: कैफ़ी आज़मी
Performed By: मो.रफ़ी

तौबा तौबा ये जवानी का गुरूर
इश्क के सामने फिर भी सर झुकाना ही पड़ा
कैसे कहते थे न आएँगे
मगर दिल ने इस तरह पुकारा
तुम्हें आना ही पड़ा

ये माना मेरी जाँ मोहब्बत सजा है
मज़ा इसमें इतना मगर किसलिए है
वो इक बेकरारी जो अब तक इधर थी
वो ही बेकरारी उधर किसलिए है
अभी तक तो इधर थी उधर किसलिए है

बहलना न जाने, बदलना न जाने
तमन्ना मचल के संभालना न जाने
करीब और आओ, कदम तो बढ़ाओ
झुका दूं न मैं सर तो, सर किसलिए है
ये माना मेरी जाँ...

नज़ारे भी देखे, इशारे भी देखे
कई खूबसूरत सहारे भी देखे
नाम क्या चीज़ है, इज्ज़त क्या है
सोने चांदी की हकीकत क्या है
लाख बहलाए कोई दौलत से
प्यार के सामने दौलत क्या है
जो मैखाने जा के, मैं सागर उठाऊं
तो फिर ये नशीली नज़र किसलिए है
ये माना मेरी जाँ...

तुम्हीं ने संवारा, तुम्हीं ने सजाया
मेरे सूने दिल को तुम्हीं ने बसाया
जिस चमन से भी तुम गुजार जाओ
हर कली पर निखार आ जाये
रूठो जाओ तो रूठ जाये खुदा
और जो हँस दो, बहार आ जाये
तुम्हारे कदम से है घर में उजाला
अगर तुम नहीं तो ये घर किसलिए है
ये माना मेरी जाँ...

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रविवार, 26 फ़रवरी 2012

तुम जो मिल गए हो - Tum Jo Mil Gaye Ho (Md.Rafi)



Movie/Album: हँसते ज़ख्म (1973)
Music By: मदन मोहन
Lyrics By: कैफ़ी आज़मी
Performed By: मो.रफ़ी, लता मंगेशकर

तुम जो मिल गए हो, तो ये लगता है
के जहां मिल गया
एक भटके हुए राही को, कारवाँ मिल गया

बैठो न दूर हमसे, देखो खफ़ा न हो
क़िस्मत से मिल गए हो, मिलके जुदा न हो
मेरी क्या ख़ता है, होता है ये भी
की ज़मीं से भी कभी आसमां मिल गया
तुम जो मिल गए हो...

तुम क्या जानो तुम क्या हो, एक सुरीला नगमा हो
भीगी रातों में मस्ती, तपते दिल में साया हो
अब जो आ गए हो जाने न दूंगा
की मुझे इक हसीं मेहरबाँ मिल गया
तुम जो मिल गए हो...

तुम भी थे खोए-खोए, मैं भी बुझा-बुझा
था अजनबी ज़माना, अपना कोई न था
दिल को जो मिल गया है तेरा सहारा
इक नई ज़िंदगी का निशां मिल गया
तुम जो मिल गए हो...

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