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शनिवार, 6 जुलाई 2013

हम दर्द का अफ़साना - Hum Dard Ka Afsana (Shamshad Begum, Dard)



Movie/Album: दर्द (1947)
Music By: खैय्याम
Lyrics By: नक्श ल्यालपुरी
Performed By: शमशाद बेगम

हम दर्द का अफ़साना दुनिया को सुना देंगे
हर दिल में मुहब्बत के इक आग लगा देंगे

हो जायेगी फिर दुनिया आबाद यतीमों की
गूंजेगी ज़माने में फ़रियाद यतीमों की
रोते हुए नगमों से तूफ़ां उठा देंगे
हर दिल में मुहब्बत की...

सरकार-ए-दो आलम की उम्मत पे सितम क्यों हो
अल्लाह के बन्दों को मझदार का ग़म क्यों हो
इस्लाम की कश्ती को हम पार लगा देंगे
हम दर्द का अफ़साना...

एहसान यतीमों की तक़दीर पे कर डालो
फ़रियाद है दिलवालों, फ़रियाद है दिलवालों
हम पर भी करम करना, हम तुम को दुआ देंगे
हर दिल में मुहब्बत की...

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शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

अहल-ए-दिल यूँ भी - Ahl-e-Dil Yun Bhi (Bhupinder, Lata, Dard)



Movie/Album: दर्द (1947)
Music By: खैय्याम
Lyrics By: नक्श ल्यालपुरी
Performed By: भूपिंदर सिंह, लता मंगेशकर

अहल-ए-दिल यूँ भी निभा लेते हैं
दर्द सीने में छुपा लेते हैं

भूपिंदर सिंह
ज़ख्म जैसे भी मिले, ज़ख्मों से
दिल के दामन को सजा लेते हैं
दर्द सीने में...

अपने क़दमों पे मोहब्बत वाले
आसमानों को झुका लेते हैं
दर्द सीने में...

लता मंगेशकर
दिल की महफ़िल में उजालों के लिये
याद की शम्मा जला लेते हैं
दर्द सीने में...

जलते मौसम में भी ये दीवाने
कुछ हसीं फूल खिला लेते हैं
दर्द सीने में...

अपनी आँखों को बनाकर ये ज़ुबाँ
कितने अफ़साने सुना लेते हैं
दर्द सीने में...

जिनको जीना है मोहब्बत के लिये
अपनी हस्ती को मिटा लेते हैं
दर्द सीने में...

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बुधवार, 3 जुलाई 2013

न जाने क्या हुआ - Na Jaane Kya Hua (Lata Mangeshkar, Dard)



Movie/Album: दर्द (1947)
Music By: खैय्याम
Lyrics By: नक्श ल्यालपुरी
Performed By: लता मंगेशकर

न जाने क्या हुआ, जो तूने छू लिया
खिला गुलाब की तरह मेरा बदन
निखर निखर गई, सँवर सँवर गई
बना के आईना तुझे ऐ जान-ए-मन
न जाने क्या हुआ...

बिखरा है काजल फ़िज़ाओं में, भीगी भीगी हैं शामें
बूँदों की रिमझिम से जागी, आग ठंडी हवा में
आजा सनम ये हसीं आग हम, लें दिल में बसा
न जाने क्या हुआ...

आँचल कहाँ मैं कहाँ हूँ, ये मुझे होश क्या है
ये बेख़ुदी तूने दी है, प्यार का ये नशा है
सुन ले ज़रा साज़-ए-दिल गा रहा है नग़मा तेरा
न जाने क्या हुआ...

कलियों की ये सेज महके, रात जागे मिलन की
खो जाएँ धड़कन में तेरी, धड़कनें मेरे मन की
आ पास आ, तेरी हर साँस में, मैं जाऊँ समा
न जाने क्या हुआ...

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गुरुवार, 9 दिसंबर 2010

अपनी ज़ुल्फें मेरे शानों पे - Apni Zulfein Mere Shaanon Pe (Hariharan)



Movie/Album : ताज महल (2005)
Music By : नौशाद अली
Lyrics By : नक्श ल्याल्ल्पुरी, स्येद गुलरेज़
Performed By : हरिहरन

अपनी ज़ुल्फें मेरे शानों पे बिखर जाने दो
आज रोको ना मुझे हद से गुज़र जाने दो

तुम जो आये तो बहारों पे शबाब आया है
इन नज़रों पे भी हल्का सा नशा छाया है
अपनी आँखों का नशा और भी बढ़ जाने दो
अपनी ज़ुल्फें...

सुर्ख होठों पे गुलाबों का गुमां होता है
ऐसा मंज़र हो जहाँ होश कहाँ रहता है
ये हसीं होंठ मेरे होठों से मिल जाने दो
अपनी ज़ुल्फें...

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