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मंगलवार, 8 मार्च 2011

दिल चाहता है - Dil Chahta Hai (Shankar Mahadevan, Chorus)



Movie/Album: दिल चाहता है (2001)
Music By : शंकर, एहसान, लॉय
Lyrics By : जावेद अख्तर
Performed By : श्रीनिवास

दिल चाहता है
कभी ना बीतें चमकीले दिन
दिल चाहता है
हम ना रहें कभी यारों के बिन
दिन-दिन भर हों प्यारी बातें
झूमें शामें गायें रातें
मस्ती में रहे डूबा-डूबा हमेशा समाँ
हमको राहों में यूँ ही मिलती रहें खुशियाँ

जगमगाते हैं, झिलमिलाते हैं अपने रास्ते
ये खुशी रहे रौशनी रहे अपने वास्ते

जहाँ रुकें हम जहाँ भी जाएं
जो हम चाहें वो हम पाएं
मस्ती में रहे...

कैसा अजब ये सफ़र है
सोचो तो हर इक ही बेखबर है
उसको जाना किधर है
जो वक़्त आए, जाने क्या दिखाए
दिल चाहता है...

रंग बिरंगे मौसम आएँ
नए नए वो सपने लाएँ
महकी रहें ख्वाबों की हसीं वादियाँ
खिलते रहें यूँ ही प्यार के ये गुलसिताँ
दिल चाहता है...

फिर से मिलें जो हम दीवाने
तो ये समझें ये तो ये जानें
हम भी रहें यार हमारे जहाँ आए नहीं
कभी हममें कोई दूरियाँ
दिल चाहता है...

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सोमवार, 7 मार्च 2011

कैसी है ये रुत - Kaisi Hai Ye Rut (Srinivas)



Movie/Album: दिल चाहता है (2001)
Music By : शंकर, एहसान, लॉय
Lyrics By : जावेद अख्तर
Performed By : श्रीनिवास

कैसी है ये रुत कि जिसमें फूल बनके दिल खिले
घुल रहे हैं रंग सारे, घुल रही हैं खुशबुएँ
चाँदनी, झरने, घटायें, गीत, बारिश, तितलियाँ
हम पे हो गये हैं सब मेहरबां

देखो, नदी के किनारे,
पंछी पुकारे, किसी पंछी को
देखो, ये जो नदी है,
मिलने चली है, सागर ही को
ये प्यार का ही सारा है कारवाँ
कैसी है ये...

कैसे, किसी को बतायें,
कैसे ये समझायें, क्या प्यार है
इसमें, बंधन नहीं है,
और ना कोई भी, दीवार है
सुनो प्यार की निराली है दास्ताँ
कैसी है ये...

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सोमवार, 13 सितंबर 2010

तन्हाई - Tanhayee (Sonu Nigam)



Movie/Album: दिल चाहता है (2001)
Music By : शंकर, एहसान, लॉय
Lyrics By : जावेद अख्तर
Performed By : सोनू निगम

तन्हाई, तन्हाई
दिल के रास्ते में कैसी ठोकर मैंने खायी
टूटे ख्वाब सारे, एक मायूसी है छायी
हर ख़ुशी सो गयी, ज़िन्दगी खो गयी
तुमको जो प्यार किया मैंने तो सज़ा में पायी
तन्हाई, तन्हाई, मीलों है फैली हुई तन्हाई

ख्वाब में देखा था एक आँचल
मैंने अपने हाथों में
अब टूटे सपनों के शीशे
चुभते हैं इन आँखों में
कल कोई था यहीं, अब कोई भी नहीं
बनके नागिन जैसे है साँसों में लहराई
तन्हाई, तन्हाई, पलकों पे कितने आंसू है लायी

क्यों ऐसी उम्मीद की मैंने
जो ऐसे नाकाम हुई
दूर बनायी थी मंजिल
तो रस्ते में ही शाम हुई
अब कहाँ जाऊं मैं, किसको समझाऊँ मैं
क्या मैंने चाहा था और क्या किस्मत में आई
तन्हाई, तन्हाई, जैसे अंधेरों की हो गहराई

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