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शनिवार, 27 जुलाई 2013

फिर छिड़ी रात - Phir Chhidi Raat (Lata Mangeshkar, Talat Aziz, Bazaar)



Movie/Album: बाज़ार (1982)
Music By: खैय्याम
Lyrics By: मखदूम मोहिउद्दीन
Performed By: लता मंगेशकर, तलत अज़ीज़

फिर छिड़ी रात, बात फूलों की
रात है या बारात फूलों की

फूल के हार, फूल के गजरे
शाम फूलों की, रात फूलों की
फिर छिड़ी रात...

आपका साथ, साथ फूलों का
आपकी बात, बात फूलों की
फिर छिड़ी रात...

फूल खिलते रहेंगे दुनिया में
रोज़ निकलेगी बात फूलों की
फिर छिड़ी रात...

नज़रें मिलती हैं जाम मिलते हैं
मिल रही है हयात फूलों की
फिर छिड़ी रात...

ये महकती हुई ग़ज़ल मखदूम
जैसे सहरा में रात फूलों की
फिर छिड़ी रात...

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शुक्रवार, 19 जुलाई 2013

फिर ठेस लगी दिल को - Phir Thes Lagi Dil Ko (Asha Bhosle, Kashmir Ki Kali)



Movie/Album: कश्मीर की कली (1964)
Music By: ओ.पी.नैय्यर
Lyrics By: एस.एच.बिहारी
Performed By: आशा भोंसले

फिर ठेस लगी दिल को, फिर याद ने तड़पाया
फिर बहने लगे आँसू, दिल दर्द से भर आया
फिर ठेस लगी...

दुनिया तेरे गुलशन से इक फूल चुना हमने
अफ़सोस कि दामन को काँटों से भरा पाया
फिर ठेस लगी...

इक वो हैं ख़ुदा रखे जो भूल गए हमको
इक हम हैं कि होंठों पर शिक़वा ना कभी आया
फिर बहने लगे...

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मंगलवार, 23 अप्रैल 2013

फिर वही रात है - Phir Wahi Raat Hai (Kishore Kumar)



Movie/Album: घर (1978)
Music By: आर.डी.बर्मन
Lyrics By: गुलज़ार
Performed By: किशोर कुमार

फिर वही रात है
फिर वही रात है ख्वाब की
रात भर ख्वाब में देखा करेंगे तुम्हें
फिर वही रात है...

काँच के ख्वाब हैं, आँखों में चुभ जायेंगे
पलकों पे लेना इन्हें, आँखों में रुक जायेंगे
ये रात है ख्वाब की, ख्वाब की रात है
फिर वही रात है...

मासूम सी नींद में, जब कोई सपना चले
हमको बुला लेना तुम, पलकों के पर्दे तले
ये रात है ख्वाब की, ख्वाब की रात है
फिर वही रात है...

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सोमवार, 13 जून 2011

फलक तक चल - Falak Tak Chal (Udit Narayan, Mahalakshmi Iyer)



Movie/Album : टशन (2008)
Music By : विशाल-शेखर
Lyrics By : कौसर मुनीर
Performed By : उदित नारायण, महालक्ष्मी ऐय्यर

फलक तक चल साथ मेरे
फलक तक चल साथ चल
ये बादल की चादर
ये तारों के आँचल
में छुप जाएं हम पल दो पल

देखो कहाँ आ गये हम सनम साथ चलते
जहाँ दिन की बाँहों में रातों के साये हैं ढलते
चल वो चौबारे ढूंढें, जिनमें चाहत की बूँदें
सच कर दे सपनो को सभी
आँखों को मीचे-मीचे, मैं तेरे पीछे-पीछे
चल दूँ जो कह दे तू अभी
बहारों के छत हो, दुआओं के ख़त हो
बढ़ते रहे ये ग़ज़ल
फलक तक...

देखा नहीं मैंने पहले कभी ये नजारा
बदला हुआ सा लगे मुझको आलम ये सारा
सूरज को हुई हरारत, रातों को करे शरारत
बैठा है खिड़की पे तेरी
इस बात पे चाँद भी बिगड़ा, कतरा-कतरा वो पिघला
भर आया आँखों में मेरी
तो सूरज बुझा दूँ, तुझे मैं सजा दूँ
सवेरा हो तुझसे ही कल
फलक तक...

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