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शुक्रवार, 18 मई 2012

दो दीवाने शहर में - Do Deewane Sheher Mein (Bhupinder Singh, Runa Laila)



Movie/Album: घरौंदा (1977)
Music By: जयदेव
Lyrics By: गुलज़ार
Performed By: भूपिंदर सिंह, रुना लैला

दो दीवाने शहर में
रात में और दोपहर में
आब-ओ-दाना ढूँढते हैं
इक आशियाना ढूँढते हैं

इन भूल-भुलइया गलियों में, अपना भी कोई घर होगा
अम्बर पे खुलेगी खिड़की या, खिड़की पे खुला अम्बर होगा
असमानी रंग की आँखों में
असमानी या आसमानी?
असमानी रंग की आँखों में
बसने का बहाना ढूंढते हैं, ढूंढते हैं
आबोदाना ढूंढते हैं...
दो दीवाने शहर में...

जब तारे ज़मीं पर
तारे, और ज़मीं पर?
Of Course!
जब तारे ज़मीं पर चलते हैं
आकाश ज़मीं हो जाता है
उस रात नहीं फिर घर जाता, वो चांद यहीं सो जाता है
जब तारे ज़मीं पर चलते हैं
आकाश ज़मीं हो जाता है
उस रात नहीं फिर घर जाता, वो चांद यहीं सो जाता है
पल भर के लिये इन आँखों में हम एक ज़माना ढूंढते हैं, ढूंढते हैं
आबोदाना ढूंढते हैं...
दो दीवाने शहर में...

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शनिवार, 16 अक्टूबर 2010

एक अकेला इस शहर में - Ek Akela Is Sheher Mein (Bhupinder Singh)



Movie/Album : घरोंदा (1977)
Music By : जयदेव
Lyrics By : गुलज़ार
Performed By : भूपिंदर सिंह

एक अकेला इस शहर में, रात में और दोपहर में
आबोदाना ढूंढ़ता है, आशियाना ढूंढ़ता है

दिन खाली-खाली बर्तन है, और रात है जैसे अँधा कुआं
इन सूनी अँधेरी आँखों में, आंसूं की जगह आता हैं धुंआ
जीने की वजह तो कोई नहीं मरने का बहाना ढूंढ़ता है
एक अकेला इस शहर में...

इन उम्र से लम्बी सड़कों को, मंजिल पे पहुँचते देखा नहीं
बस दौड़ती फिरती रहती हैं, हमने तो ठहरते देखा नहीं
इस अजनबी से शहर में जाना पहचाना ढूंढ़ता है
एक अकेला इस शहर में...

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