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सोमवार, 21 अक्टूबर 2013

यारों नीलाम करो सुस्ती - Yaaron Nilaam Karo Susti (Kishore, Bhupinder, Prem Pujari)



Movie/Album: प्रेम पुजारी (1970)
Music By: एस.डी.बर्मन
Lyrics By: नीरज
Performed By: किशोर कुमार, भूपिंदर सिंह

गम पे धूल डालो, कहकहा लगा लो
अरे काँटों की डगरिया जिंदगानी है
तुम जो मुस्कुरा दो राजधानी है
ये होंठ सूखे सूखे, ये बाल रूखे रूखे
बोलो छायी उदासी क्यूँ यारों?
यारों नीलाम करो सुस्ती
हमसे उधार ले लो मस्ती
अरे हँसती का नाम तंदरुस्ती

नदी गीत गाये, झरना गुनगुनाये
कोई गीत तुम भी साथ गा दो ना
दीप एक राह पर जला दो ना
अरे हवा सीधी सीधी, सांझ पीरी पीरी
समा सुहाना कैसा देखो
यारों नीलाम करो सुस्ती...

आँख ना चुराओ, रूठ कर न जाओ
अरे फूल जल उठेंगे, इन बहारों में
धुंआ सा उड़ेगा सब नजारों में
अरे तीर मार गोरी, अरे हाँ चोरी चोरी
मेरा दिल निशाना बना यारों

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बुधवार, 24 जुलाई 2013

करोगे याद तो - Karoge Yaad To (Bhupinder, Bazaar)



Movie/Album: बाज़ार (1982)
Music By: खैय्याम
Lyrics By: बशर नवाज़
Performed By: भूपिंदर

करोगे याद तो, हर बात याद आयेगी
गुज़रते वक़्त की, हर मौज ठहर जायेगी
करोगे याद तो...

ये चाँद बीते ज़मानों का आईना होगा
भटकते अब्र में, चेहरा कोई बना होगा
उदास राह कोई दास्तां सुनाएगी
करोगे याद तो...

बरसता भीगता मौसम धुआँ-धुआँ होगा
पिघलती शम्मों पे दिल का मेरे ग़ुमां होगा
हथेलियों की हिना, याद कुछ दिलायेगी
करोगे याद तो...

गली के मोड़ पे, सूना सा कोई दरवाज़ा
तरसती आँखों से रस्ता किसी का देखेगा
निगाह दूर तलक जा के लौट आएगी
करोगे याद तो...

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शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

अहल-ए-दिल यूँ भी - Ahl-e-Dil Yun Bhi (Bhupinder, Lata, Dard)



Movie/Album: दर्द (1947)
Music By: खैय्याम
Lyrics By: नक्श ल्यालपुरी
Performed By: भूपिंदर सिंह, लता मंगेशकर

अहल-ए-दिल यूँ भी निभा लेते हैं
दर्द सीने में छुपा लेते हैं

भूपिंदर सिंह
ज़ख्म जैसे भी मिले, ज़ख्मों से
दिल के दामन को सजा लेते हैं
दर्द सीने में...

अपने क़दमों पे मोहब्बत वाले
आसमानों को झुका लेते हैं
दर्द सीने में...

लता मंगेशकर
दिल की महफ़िल में उजालों के लिये
याद की शम्मा जला लेते हैं
दर्द सीने में...

जलते मौसम में भी ये दीवाने
कुछ हसीं फूल खिला लेते हैं
दर्द सीने में...

अपनी आँखों को बनाकर ये ज़ुबाँ
कितने अफ़साने सुना लेते हैं
दर्द सीने में...

जिनको जीना है मोहब्बत के लिये
अपनी हस्ती को मिटा लेते हैं
दर्द सीने में...

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शनिवार, 30 जून 2012

दिल ढूँढता है - Dil Dhoondhta Hai (Bhupinder Singh, Lata Mangeshkar)



Movie/Album: मौसम (1975)
Music By: मदन मोहन
Lyrics By: गुलज़ार
Performed By: भूपिंदर सिंह, लता मंगेशकर

दिल ढूँढता है फिर वही फ़ुरसत के रात दिन
बैठे रहे तसव्वुर-ए-जानाँ किये हुए
दिल ढूँढता है...

जाड़ों की नर्म धूप और आँगन में लेट कर
आँखों पे खींचकर आँचल के साये को
औंधे पड़े रहें कभी करवट लिये हुए
दिल ढूँढता है...

या गरमियों की रात जो पुरवाईयाँ चलें
ठंडी सफ़ेद चादरों पे जागें देर तक
तारों को देखते रहें छत पर पड़े हुए
दिल ढूँढता है...

बर्फ़ीली सर्दियों में किसी भी पहाड़ पर
वादी में गूँजती हुई खामोशियाँ सुनें
आँखों में भीगे-भीगे लम्हें लिये हुए
दिल ढूँढता है...

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शनिवार, 9 जून 2012

बीती ना बिताई रैना - Beeti Na Bitaayi Raina (Lata Mangeshkar, Bhupinder)



Movie/Album: परिचय (1972)
Music By: आर.डी.बर्मन
Lyrics By: गुलज़ार
Performed By: लता मंगेशकर, भूपिंदर

बीती न बिताई रैना बिरहा की जाई रैना
भीगी हुई अंखियों ने लाख बुझाई रैना

बीती हुई बतियाँ कोई दोहराये
भूले हुए नामों से कोई तो बुलाये
चाँद..
चाँद की बिन दीवानी, बिन दीवानी रतियाँ
जागी हुई अंखियों में रात न आई रैना
बीती न बिताई रैना...

युग आते हैं और युग जाए
छोटी-छोटी यादों के
पल नहीं जाए
झूठ से काली लागे, लागे काली रतिया
रूठी हुईं अंखियों ने लाख मनाई रैना
बीती ना बिताई रैना...

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शुक्रवार, 18 मई 2012

दो दीवाने शहर में - Do Deewane Sheher Mein (Bhupinder Singh, Runa Laila)



Movie/Album: घरौंदा (1977)
Music By: जयदेव
Lyrics By: गुलज़ार
Performed By: भूपिंदर सिंह, रुना लैला

दो दीवाने शहर में
रात में और दोपहर में
आब-ओ-दाना ढूँढते हैं
इक आशियाना ढूँढते हैं

इन भूल-भुलइया गलियों में, अपना भी कोई घर होगा
अम्बर पे खुलेगी खिड़की या, खिड़की पे खुला अम्बर होगा
असमानी रंग की आँखों में
असमानी या आसमानी?
असमानी रंग की आँखों में
बसने का बहाना ढूंढते हैं, ढूंढते हैं
आबोदाना ढूंढते हैं...
दो दीवाने शहर में...

जब तारे ज़मीं पर
तारे, और ज़मीं पर?
Of Course!
जब तारे ज़मीं पर चलते हैं
आकाश ज़मीं हो जाता है
उस रात नहीं फिर घर जाता, वो चांद यहीं सो जाता है
जब तारे ज़मीं पर चलते हैं
आकाश ज़मीं हो जाता है
उस रात नहीं फिर घर जाता, वो चांद यहीं सो जाता है
पल भर के लिये इन आँखों में हम एक ज़माना ढूंढते हैं, ढूंढते हैं
आबोदाना ढूंढते हैं...
दो दीवाने शहर में...

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शनिवार, 16 अक्टूबर 2010

एक अकेला इस शहर में - Ek Akela Is Sheher Mein (Bhupinder Singh)



Movie/Album : घरोंदा (1977)
Music By : जयदेव
Lyrics By : गुलज़ार
Performed By : भूपिंदर सिंह

एक अकेला इस शहर में, रात में और दोपहर में
आबोदाना ढूंढ़ता है, आशियाना ढूंढ़ता है

दिन खाली-खाली बर्तन है, और रात है जैसे अँधा कुआं
इन सूनी अँधेरी आँखों में, आंसूं की जगह आता हैं धुंआ
जीने की वजह तो कोई नहीं मरने का बहाना ढूंढ़ता है
एक अकेला इस शहर में...

इन उम्र से लम्बी सड़कों को, मंजिल पे पहुँचते देखा नहीं
बस दौड़ती फिरती रहती हैं, हमने तो ठहरते देखा नहीं
इस अजनबी से शहर में जाना पहचाना ढूंढ़ता है
एक अकेला इस शहर में...

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