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मंगलवार, 19 जून 2012

ना मुँह छुपा के जियो - Na Munh Chhupa Ke Jiyo (Mahendra Kapoor)



Movie/Album : हमराज़ (1967)
Music By : रवि
Lyrics By : साहिर लुधियानवी
Performed By : महेंद्र कपूर

ना मुँह छुपा के जियो और ना सर झुका के जियो
गमों का दौर भी आए तो मुस्कुरा के जियो

घटा में छुप के सितारे फना नहीं होते
अंधेरी रात के दिल में दीये जला के जियो
ना मुँह छुपा...

ना जाने कौन सा पल मौत की अमानत हो
हर एक पल की खुशी को गले लगा के जियो
ना मुँह छुपा...

ये जिंदगी किसी मंजिल पे रूक नहीं सकती
हर इक मकाम से आगे कदम बढ़ा के जियो
ना मुँह छुपा...

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गुरुवार, 3 जून 2010

हे नीले गगन के तले - He Neele Gagan Ke Tale (Mahendra Kapoor)



Movie/Album : हमराज़ (1967)
Music By : रवि
Lyrics By : साहिर लुधियानवी
Performed By : महेंद्र कपूर

हे नीले गगन के तले
धरती का प्यार पले
ऐसे ही जग में आती हैं सुबहें
ऐसे ही शाम ढले

शबनम के मोती, फूलों पे बिखरे
दोनों की आस फले
हे नीले...

बलखाती बेलें, मस्ती में खेलें
पेड़ों से मिलके गले
हे नीले...

नदियाँ का पानी, दरिया से मिलके
सागर की ओर चले
हे नीले...

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तुम अगर साथ देने - Tum Agar Saath Dene Ka (Mahendra Kapoor)



Movie/Album : हमराज़ (1967)
Music By : रवि
Lyrics By : साहिर लुधियानवी
Performed By : महेंद्र कपूर

तुम अगर साथ देने का वादा करो
मैं यूँ ही मस्त नगमे लुटाता रहूँ
तुम मुझे देख कर मुस्कुराती रहो
मैं तुम्हें देख कर गीत गाता रहूँ

कितने जलवे फिज़ाओं में बिखरे मगर
मैंने अब तक किसी को उतारा नहीं
तुमको देखा तो नज़रें ये कहने लगी
हमको चेहरे से हटना गंवारा नहीं
तुम अगर मेरी नज़रों के आगे रहो
मैं हर एक शय से नज़रें चुराता रहूँ
तुम अगर...

मैंने ख़्वाबों में बरसों तराशा जिसे
तुम वही संगमरमर की तस्वीर हो
तुम न समझो तुम्हारा मुकद्दर हूँ मैं
मैं समझता हूँ तुम मेरी तकदीर हो
तुम अगर मुझको अपना समझने लगो
मैं बहारों की महफ़िल सजाता रहूँ
तुम अगर...

मैं अकेला बहुत देर चलता रहा
अब सफ़र ज़िन्दगानी का कटता नहीं
जब तलक कोई रंगीं सहारा न हो
वक़्त काफिर जवानी का कटता नहींरंगी
तुम अगर हमकदम बनके चलती रहो
मैं ज़मीन पर सितारे बिछाता रहूँ
तुम अगर...

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किसी पत्थर की मूरत से - Kisi Patthar Ki Moorat Se (Mahendra Kapoor)



Movie/Album : हमराज़ (1967)
Music By : रवि
Lyrics By : साहिर लुधियानवी
Performed By : महेंद्र कपूर

किसी पत्थर की मूरत से मुहब्बत का इरादा है
परस्तिश की तमन्ना है, इबादत का इरादा है

जो दिल की धड़कनें समझे, ना आँखों की जुबां समझे
नज़र की गुफ्तगू समझे, ना जज़बों का बयां समझे
उसी के सामने उसकी शिकायत का इरादा है
किसी...

सुना है हर जवां पत्थर के दिल में आग होती है
मगर जब तक ना छेड़ो, शर्म के परदे में सोती है
ये सोचा है कि दिल की बात उसके रूबरू कह दे
नतीजा कुछ भी निकले आज अपनी आरजू कह दे
हर इक बेजां तक़ल्लुफ़ से बगावत का इरादा है
किसी...

मुहब्बत बेरुखी से और भड़केगी वो क्या जाने
तबीयत इस अदा पे और फड़केगी वो क्या जाने
वो क्या जाने की अपना किस क़यामत का इरादा है
किसी...

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