Shaharyar लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Shaharyar लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 23 जुलाई 2013

ये क्या जगह है दोस्तों - Ye Kya Jagah Hai Doston (Asha Bhosle, Umrao Jaan)



Movie/Album: उमराव जान (1981)
Music By: खैय्याम
Lyrics By: शहरयार
Performed By: आशा भोंसले

ये क्या जगह है दोस्तों, ये कौन सा दयार है
हद-ए-निगाह तक जहाँ गुबार ही गुबार है
ये क्या जगह है दोस्तों...

ये किस मकाम पर हयात, मुझको लेके आ गई
ना बस खुशी पे जहाँ, ना ग़म पे इख़्तियार है
ये क्या जगह है...

तमाम उम्र का हिसाब मांगती है ज़िन्दगी
ये मेरा दिल कहे तो क्या, ये खुद से शर्मसार है
ये क्या जगह है...

बुला रहा क्या कोई चिलमनों के उस तरफ़
मेरे लिये भी क्या कोई उदास बेक़रार है
ये क्या जगह है...

न जिसकी शकल है कोई, न जिसका नाम है कोई
इक ऐसी शै का क्यों हमें अज़ल से इन्तज़ार है
ये क्या जगह है...

Share:

शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2012

दिल चीज़ क्या है - Dil Cheez Kya Hai (Asha Bhosle)



Movie/Album: उमराव जान (1981)
Music By: खय्याम
Lyrics By: शहरयार
Performed By: आशा भोंसले

दिल चीज़ क्या है, आप मेरी जान लीजिये
बस एक बार मेरा कहा मान लीजिये

इस अंजुमन में आपको आना है बार-बार
दीवार-ओ-दर को गौर से पहचान लीजिये
दिल चीज़ क्या है...

माना के दोस्तों को नहीं दोस्ती का पास
लेकिन ये क्या के गैर का अहसान लीजिये
दिल चीज़ क्या है...

कहिये तो आसमां को ज़मीं पर उतार लाएं
मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिये
दिल चीज़ क्या है...

Share:

इन आँखों की मस्ती के - In Aankhon Ki Masti Ke (Asha Bhosle)



Movie/Album: उमराव जान (1981)
Music By: खय्याम
Lyrics By: शहरयार
Performed By: आशा भोंसले

इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं
इन आँखों से वाबस्ता अफ़साने हज़ारों हैं

इक तुम ही नहीं तन्हाँ, उल्फ़त में मेरी रुसवा
इस शहर में तुम जैसे दीवाने हज़ारों हैं
इन आँखों की...

इक सिर्फ़ हम ही मय को, आँखों से पिलाते हैं
कहने को तो दुनिया में मयख़ाने हज़ारों हैं
इन आँखों की...

इस शम्म-ए-फ़रोज़ाँ को, आँधी से डराते हो
इस शम्म-ए-फ़रोज़ाँ के परवाने हज़ारों हैं
इन आँखों की...

Share:

बुधवार, 18 मई 2011

सीने में जलन - Seene Mein Jalan (Suresh Wadkar)



Movie/Album : गमन (1978)
Music By : जयदेव
Lyrics By : शहरयार
Performed By : सुरेश वाडकर

सीने में जलन, आँखों में तूफ़ान सा क्यों है
इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यों है

दिल है तो, धड़कने का बहाना कोई ढूंढें
पत्थर की तरह बेहिस-ओ-बेजान सा क्यों है
सीने में...

तनहाई की ये कौन सी, मंजिल है रफीकों
ता-हद-ये-नज़र एक बयाबान सा क्यों है
सीने में...

क्या कोई नयी बात नज़र आती है हममें
आईना हमें देख के हैरान सा क्यों है
सीने में...

Share: