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मंगलवार, 8 जनवरी 2013

चुनरी संभाल गोरी - Chunri Sambhal Gori (Manna Dey, Lata Mangeshkar)



Movie/Album: बहारों के सपने (1967)
Music By: आर.डी.बर्मन
Lyrics By: मजरूह सुल्तानपुरी
Performed By: मन्ना डे, लता मंगेशकर

चुनरी सम्भाल गोरी, उड़ी चली जाए रे
मार न दे डंक कहीं, नज़र कोई हाय
देख देख पग न फिसल जाए रे

फिसलें नहीं चल के, कभी दुख की डगर पे
ठोकर लगे हँस दें, हम बसने वाले, दिल के नगर के
अरे, हर कदम बहक के सम्भल जाए रे!

किरणें नहीं अपनी, तो है बाहों का सहारा
दीपक नहीं जिन में, उन गलियों में है हमसे उजाले
अरे, भूल ही से चाँदनी खिल जाए रे!

पल छिन पिया पल छिन, अँखियों का अंधेरा
रैना नहीं अपनी, पर अपना होगा कल का सवेरा
अरे, रैन कौन सी जो न ढल जाए रे!

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सोमवार, 7 जनवरी 2013

आजा पिया तोहे - Aaja Piya Tohe Pyar (Asha Bhosle)



Movie/Album: बहारों के सपने (1967)
Music By: आर.डी.बर्मन
Lyrics By: मजरूह सुल्तानपुरी
Performed By: आशा भोंसले

आजा पिया, तोहे प्यार दूँ
गोरी बय्याँ, तोपे वार दूँ
किसलिए तू, इतना उदास?
सूखे सूखे होंठ, अखियों में प्यास
किसलिए, किसलिए?
आजा पिया...

जल चुके हैं बदन कई, पिया इसी रात में
थके हुए इन हाथों को, दे दे मेरे हाथ में
सुख मेरा ले ले, मैं दुःख तेरे ले लूं
मैं भी जीयूं, तू भी जिए
आजा पिया...

होने दे रे, जो ये जुल्मी है, पथ तेरे गाँव के
पलकों से छू डालूँगी मैं, कांटे तेरे पाँव के
लट बिखराए, चुनरियाँ बिछाए
बैठी हूँ मैं, तेरे लिए
आजा पिया...

अपनी तो, जब अखियों से, बह चलें धार के
खिल पडी, वही एक हसीं, पिया तेरे प्यार के
मैं जो नहीं हारी, सजन ज़रा सोचो
किसलिए, किसलिए?
आजा पिया...

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रविवार, 6 जनवरी 2013

ज़माने ने मारे - Zamane Ne Maare (Md.Rafi)



Movie/Album: बहारों के सपने (1967)
Music By: आर.डी.बर्मन
Lyrics By: मजरूह सुल्तानुरी
Performed By: मो.रफ़ी

ज़माने ने मारे जवाँ कैसे-कैसे
ज़मीं खा गई आसमाँ कैसे-कैसे
पले थे जो कल रंग में धूल में
हुए दर-ब-दर कारवाँ कैसे-कैसे
ज़माने ने मारे...

हज़ारों के तन कैसे शीशे हों चूर
जला धूप में कितनी आँखों का नूर
चेहरे पे ग़म के निशाँ कैसे-कैसे
ज़माने ने मारे...

लहू बन के बहते वो आँसू तमाम
कि होगा इन्हीं से बहारों का नाम
बनेंगे अभी आशियाँ कैसे-कैसे
ज़माने ने मारे...

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शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010

क्या जानूं सजन - Kya Jaanoon Sajan (Lata Mangeshkar)



Movie/Album : बहारों के सपने (1967)
Music By : आर.डी.बर्मन
Lyrics By : मजरूह सुल्तानपुरी
Performed By : लता मंगेशकर

क्या जानूं सजन, होती है क्या गम की शाम
जल उठे सौ दिए, जब लिया तेरा नाम

काँटों में मैं खड़ी, नैनों के द्वार पे
नित दिन बहार के, देखूं सपने
चेहरे की धूल क्या चंदा की चांदनी
उतरी तो रह गयी, मुख पे अपनी
क्या जानूं सजन...

जब से मिली नज़र, माथे पे बन गए
बिंदिया नयन तेरे, देखो सजना
भर ली जो प्यार से मेरी कलाईयाँ
पिया तेरी उंगलियाँ हो गयी कंगना
क्या जानूं सजन..

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