One of the famous ghazals by Dushyant Kumar, whose 'ho gayi hai peer parbat si pighalni chahiye' is very popular, and used in multiple places, including the film Halla Bol. In the film Masaan, Varun Grover has written a song that uses the she'r 'tu kisi rail si guzarti hai' as the mukhDa.
main jise oDhta bichhata hoon
wo ghazal aap ko sunata hoon
the one that I use all the time and know personally,
I tell you that ghazal..
ek jungle hai teri aankhon mein
main jis mein raah bhool jaata hoon
there is a forest in your eyes,
in which I forget my path..
tu kisi rail si guzarti hai
main pul sa thartharata hoon
you pass like a train,
and I shiver like a bridge..
ek baazoo ukhaD gaya jab se
aur zyaada wazan uThaata hoon
since I have lost an arm,
I lift even more weight..
main tujhe bhoolne ki koshish mein
aur kitne kareeb paata hoon
in my try to forget you,
I come so much closer to you..
kaun ye faasla nibhayega
main farishta hoon sach batata hoon..
who would carry on with these distances (like some relationship),
I am angel, who tells the truth..
Share:
Ghazal लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Ghazal लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मंगलवार, 14 जुलाई 2015
शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2013
Sawaal-e-Wasl par Unko Udu ka Khauf Hai Itna Meaning
I was listening to Jagjit Singh singing the famous ghazal aahista aahista, and there was this line, sawaal e wasl par unko udu ka khauf hai itna, that Jagjit ji began to explain. Here is the meaning for you.
Sawaal-e-wasl was the question of meeting. In his words, when you ask for a date, that is sawaal-e-wasl. Udu is a rival. In his words again, there is a villain in every movie, he is Udu, [or Udoo]. [I am guessing we're talking about movies which have a villain fighting for the girl.] He also tells us that even an enemy can be called Udu.
Share:
Sawaal-e-wasl was the question of meeting. In his words, when you ask for a date, that is sawaal-e-wasl. Udu is a rival. In his words again, there is a villain in every movie, he is Udu, [or Udoo]. [I am guessing we're talking about movies which have a villain fighting for the girl.] He also tells us that even an enemy can be called Udu.
Share:
गुरुवार, 3 अक्टूबर 2013
Ye Kasak Dil ki Dil Mein Lyrics Translation for Ghazal
This beautiful Ghazal by Bashir Badr was once sung by Mohammad Vakil, Saregama mega final winner of 1998. Here is a translation of the ghazal, including all the shers I could find, irrespective of the ones sung.
Ye kasak dil ki dil mein chubhi rah gayi
Zindagi mein tumhaari kami rah gayi
This aching of my heart remained pinching my heart (forever)
(that) there remained an absence of yours in my life..
Ek main ek tum ek deewar thi
Zindagi aadhi aadhi banti rah gayi
It was you, me and a wall,
and life left divided into two equal pieces..
Maine roka nahi wo chala bhi gaya
Bebasi door tak dekhti reh gayi
I didn't stop him, he left too,
and helplessness kept staring till far away..
Raat ki bheegi bheegi chhaton ki tarah
Meri palkon pe thodi nami rah gayi
Like the wet roofs of night('s dew),
Some wetness was left on my eyelids too..
Ret par aansuon ne tere naam ki
Jo kahaani likhi bepadhi rah gayi
The story of your name that my tears wrote
on sand, remained unread [that is, you didn't read it]
Share:
Ye kasak dil ki dil mein chubhi rah gayi
Zindagi mein tumhaari kami rah gayi
This aching of my heart remained pinching my heart (forever)
(that) there remained an absence of yours in my life..
Ek main ek tum ek deewar thi
Zindagi aadhi aadhi banti rah gayi
It was you, me and a wall,
and life left divided into two equal pieces..
Maine roka nahi wo chala bhi gaya
Bebasi door tak dekhti reh gayi
I didn't stop him, he left too,
and helplessness kept staring till far away..
Raat ki bheegi bheegi chhaton ki tarah
Meri palkon pe thodi nami rah gayi
Like the wet roofs of night('s dew),
Some wetness was left on my eyelids too..
Ret par aansuon ne tere naam ki
Jo kahaani likhi bepadhi rah gayi
The story of your name that my tears wrote
on sand, remained unread [that is, you didn't read it]
Share:
रविवार, 1 सितंबर 2013
गुलों में रंग भरे - Gulon Mein Rang Bhare (Mehdi Hasan, Ghazal)
Music By: मेहदी हसन
Lyrics By: फैज़ अहमद 'फैज़'
Performed By: मेहदी हसन
गुलों में रंग भरे, बाद-ए-नौबहार चले
चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले
क़फ़स उदास है यारों, सबा से कुछ तो कहो
कहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले
चले भी आओ...
जो हमपे गुज़री सो गुज़री मगर शब-ए-हिज्राँ
हमारे अश्क तेरे आक़बत सँवार चले
चले भी आओ...
कभी तो सुबह तेरे कुंज-ए-लब्ज़ हो आग़ाज़
कभी तो शब सर-ए-काकुल से मुश्क-ए-बार चले
चले भी आओ...
मक़ाम 'फैज़' कोई राह में जचा ही नहीं
जो कू-ए-यार से निकले तो सू-ए-दार चले
चले भी आओ...
गाने के आगे:
बड़ा है दर्द का रिश्ता, ये दिल ग़रीब सही
तुम्हारे नाम पे आयेंगे ग़मगुसार चले
चले भी आओ...
हुज़ूर-ए-यार हुई दफ़्तर-ए-जुनूँ की तलब
गिरह में लेके गरेबाँ का तार तार चले
चले भी आओ...
Share:
शनिवार, 31 अगस्त 2013
खुदा करे के मोहब्बत में - Khuda Kare Ke Mohabbat Mein (Mehdi Hassan, Afshaan)
Movie/Album: अफशान (1971)
Music By: नाशाद
Lyrics By: तसलीम फाज़ली
Performed By: मेहदी हसन
खुदा करे के मोहब्बत में ये मक़ाम आये
किसी का नाम लूँ, लब पे तुम्हारा नाम आये
कुछ इस तरह से जिये, ज़िन्दगी बसर ना हुई
तुम्हारे बाद किसी, रात की सहर ना हुई
सहर नज़र से मिले, ज़ुल्फ़ ले के शाम आई
किसी का नाम लूँ...
खुद अपने घर में वो, मेहमान बन के आई हैं
सितम तो देखिये, अनजान बन के आये हैं
हमारी दिल की तड़प आज कुछ तो काम आये
किसी का नाम लूँ...
वही है साज़, वही गीत है, वही मंज़र
हर एक चीज़ वही है, नहीं हो तुम वो मगर
उसी तरह से निगाहें, उठें सलाम आये
किसी का नाम लूँ...
Music By: नाशाद
Lyrics By: तसलीम फाज़ली
Performed By: मेहदी हसन
खुदा करे के मोहब्बत में ये मक़ाम आये
किसी का नाम लूँ, लब पे तुम्हारा नाम आये
कुछ इस तरह से जिये, ज़िन्दगी बसर ना हुई
तुम्हारे बाद किसी, रात की सहर ना हुई
सहर नज़र से मिले, ज़ुल्फ़ ले के शाम आई
किसी का नाम लूँ...
खुद अपने घर में वो, मेहमान बन के आई हैं
सितम तो देखिये, अनजान बन के आये हैं
हमारी दिल की तड़प आज कुछ तो काम आये
किसी का नाम लूँ...
वही है साज़, वही गीत है, वही मंज़र
हर एक चीज़ वही है, नहीं हो तुम वो मगर
उसी तरह से निगाहें, उठें सलाम आये
किसी का नाम लूँ...
Share:
Labels:
1971,
Afshaan,
Ghazal,
K,
Mehdi Hasan,
Mehdi Hassan,
Nashad,
Tasleem Fazli
शुक्रवार, 30 अगस्त 2013
दिल में इक लहर सी - Dil Mein Ik Leher Si (Ghulam Ali)
Lyrics By: नासिर काज़मी
Performed By: गुलाम अली
दिल में इक लहर सी उठी है अभी
कोई ताज़ा हवा चली है अभी
शोर बरपा है ख़ाना-ए-दिल में
कोई दीवार सी गिरी है अभी
दिल में इक लहर सी...
कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज हैं हम भी
और ये चोट भी नयी है अभी
दिल में इक लहर सी...
याद के बे-निशाँ जज़ीरों से
तेरी आवाज़ आ रही है अभी
दिल में इक लहर सी...
शहर की बेचिराग़ गलियों में
ज़िन्दगी तुझको ढूँढती है अभी
दिल में इक लहर सी...
आगे (गाने में नहीं है):
भरी दुनिया में जी नहीं लगता
जाने किस चीज़ की कमी है अभी
दिल में इक लहर सी...
तू शरीक-ए-सुख़न नहीं है तो क्या
हम-सुख़न तेरी ख़ामोशी है अभी
दिल में इक लहर सी...
सो गये लोग उस हवेली के
एक खिड़की मगर खुली है अभी
दिल में इक लहर सी...
तुम तो यारो अभी से उठ बैठे
शहर में रात जागती है अभी
दिल में इक लहर सी...
वक़्त अच्छा भी आयेगा 'नासिर'
ग़म न कर ज़िन्दगी पड़ी है अभी
दिल में इक लहर सी...
Performed By: गुलाम अली
दिल में इक लहर सी उठी है अभी
कोई ताज़ा हवा चली है अभी
शोर बरपा है ख़ाना-ए-दिल में
कोई दीवार सी गिरी है अभी
दिल में इक लहर सी...
कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज हैं हम भी
और ये चोट भी नयी है अभी
दिल में इक लहर सी...
याद के बे-निशाँ जज़ीरों से
तेरी आवाज़ आ रही है अभी
दिल में इक लहर सी...
शहर की बेचिराग़ गलियों में
ज़िन्दगी तुझको ढूँढती है अभी
दिल में इक लहर सी...
आगे (गाने में नहीं है):
भरी दुनिया में जी नहीं लगता
जाने किस चीज़ की कमी है अभी
दिल में इक लहर सी...
तू शरीक-ए-सुख़न नहीं है तो क्या
हम-सुख़न तेरी ख़ामोशी है अभी
दिल में इक लहर सी...
सो गये लोग उस हवेली के
एक खिड़की मगर खुली है अभी
दिल में इक लहर सी...
तुम तो यारो अभी से उठ बैठे
शहर में रात जागती है अभी
दिल में इक लहर सी...
वक़्त अच्छा भी आयेगा 'नासिर'
ग़म न कर ज़िन्दगी पड़ी है अभी
दिल में इक लहर सी...
Share:
गुरुवार, 29 अगस्त 2013
हमको किसके गम ने मारा - Humko Kiske Gham Ne Maara (Ghulam Ali)
Lyrics By: मसरूर अनवर
Performed By: गुलाम अली
हमको किसके गम ने मारा, ये कहानी फिर सही
किसने तोड़ा दिल हमारा, ये कहानी फिर सही
दिल के लूटने का सबब पूछो न सबके सामने
नाम आएगा तुम्हारा, ये कहानी फिर सही
हमको किसके गम ने...
नफरतों के तीर खा कर, दोस्तों के शहर में
हमने किस किस को पुकारा, ये कहानी फिर सही
हमको किसके गम ने...
क्या बताएं प्यार की बाजी, वफ़ा की राह में
कौन जीता कौन हारा, ये कहानी फिर सही
हमको किसके गम ने...
Performed By: गुलाम अली
हमको किसके गम ने मारा, ये कहानी फिर सही
किसने तोड़ा दिल हमारा, ये कहानी फिर सही
दिल के लूटने का सबब पूछो न सबके सामने
नाम आएगा तुम्हारा, ये कहानी फिर सही
हमको किसके गम ने...
नफरतों के तीर खा कर, दोस्तों के शहर में
हमने किस किस को पुकारा, ये कहानी फिर सही
हमको किसके गम ने...
क्या बताएं प्यार की बाजी, वफ़ा की राह में
कौन जीता कौन हारा, ये कहानी फिर सही
हमको किसके गम ने...
Share:
बुधवार, 28 अगस्त 2013
कैसी चली है अब के हवा - Kaisi Chali Hai Ab Ke Hawa (Ghulam Ali)
Lyrics By: खातिर गज़नवी
Performed By: गुलाम अली
कैसी चली है अब के हवा, तेरे शहर में
बन्दे भी हो गये हैं ख़ुदा, तेरे शहर में
क्या जाने क्या हुआ कि परेशान हो गए
इक लहज़ा रुक गयी थी सबा तेरे शहर में
बन्दे भी हो गये...
कुछ दुश्मनी का ढब है न अब दोस्ती के तौर
दोनों का एक रंग हुआ तेरे शहर में
बन्दे भी हो गये...
शायद उन्हें पता था कि 'ख़ातिर' है अजनबी
लोगों ने उसको लूट लिया तेरे शहर में
बन्दे भी हो गये...
Performed By: गुलाम अली
कैसी चली है अब के हवा, तेरे शहर में
बन्दे भी हो गये हैं ख़ुदा, तेरे शहर में
क्या जाने क्या हुआ कि परेशान हो गए
इक लहज़ा रुक गयी थी सबा तेरे शहर में
बन्दे भी हो गये...
कुछ दुश्मनी का ढब है न अब दोस्ती के तौर
दोनों का एक रंग हुआ तेरे शहर में
बन्दे भी हो गये...
शायद उन्हें पता था कि 'ख़ातिर' है अजनबी
लोगों ने उसको लूट लिया तेरे शहर में
बन्दे भी हो गये...
Share:
मंगलवार, 27 अगस्त 2013
गम है या खुशी है तू - Gham Hai Ya Khushi Hai Tu (Ghulam Ali)
Lyrics By: नासिर काज़मी
Performed By: गुलाम अली
ग़म है या खुशी है तू
मेरी ज़िन्दगी है तू
आफतों के दौर में
चैन की घड़ी है तू
गम है या खुशी...
मेरी रात का चिराग
मेरी नींद भी है तू
गम है या खुशी...
मैं खिज़ां की शाम हूँ
रूत बहार की है तू
गम है या खुशी...
दोस्तों के दरमियाँ
वजह दोस्ती है तू
गम है या खुशी...
मेरी सारी उम्र में
एक ही कमी है तू
गम है या खुशी...
मैं तो वो नहीं रहा
हाँ, मगर वोही है तू
गम है या खुशी...
'नासिर' इस दयार में
कितना अजनबी है तू
गम है या खुशी...
Performed By: गुलाम अली
ग़म है या खुशी है तू
मेरी ज़िन्दगी है तू
आफतों के दौर में
चैन की घड़ी है तू
गम है या खुशी...
मेरी रात का चिराग
मेरी नींद भी है तू
गम है या खुशी...
मैं खिज़ां की शाम हूँ
रूत बहार की है तू
गम है या खुशी...
दोस्तों के दरमियाँ
वजह दोस्ती है तू
गम है या खुशी...
मेरी सारी उम्र में
एक ही कमी है तू
गम है या खुशी...
मैं तो वो नहीं रहा
हाँ, मगर वोही है तू
गम है या खुशी...
'नासिर' इस दयार में
कितना अजनबी है तू
गम है या खुशी...
Share:
रविवार, 18 अगस्त 2013
आप हैं क्यों ख़फ़ा - Aap Hain Kyon Khafa (Ghulam Ali)
Performed By: गुलाम अली
आप हैं क्यों ख़फ़ा, कुछ पता तो चले
है मेरी क्या खता, कुछ पता तो चले
आज चेहरे पे रंग-ए-उदासी क्यूँ
ऐ मेरे दिलरुबा कुछ पता तो चले
आप हैं क्यों खफ़ा...
आपके और मेरे प्यार के दरमियाँ
क्यों है यह फासिला कुछ पता तो चले
आप हैं क्यों ख़फ़ा...
मैं अगर बेवफा हूँ तो यूँ ही सही
कौन है बावफा कुछ पता तो चले
आप हैं क्यों खफ़ा...
आप हैं क्यों ख़फ़ा, कुछ पता तो चले
है मेरी क्या खता, कुछ पता तो चले
आज चेहरे पे रंग-ए-उदासी क्यूँ
ऐ मेरे दिलरुबा कुछ पता तो चले
आप हैं क्यों खफ़ा...
आपके और मेरे प्यार के दरमियाँ
क्यों है यह फासिला कुछ पता तो चले
आप हैं क्यों ख़फ़ा...
मैं अगर बेवफा हूँ तो यूँ ही सही
कौन है बावफा कुछ पता तो चले
आप हैं क्यों खफ़ा...
Share:
शनिवार, 17 अगस्त 2013
चमकते चाँद को टूटा - Chamakte Chand Ko Toota (Ghulam Ali, Awaargi)
Movie/Album: आवारगी (1990)
Music By: अनु मालिक
Lyrics By: आनंद बक्षी
Performed By: गुलाम अली
चमकते चाँद को टूटा हुआ तारा बना डाला
मेरी आवारगी ने मुझको आवारा बना डाला
बड़ा दिलकश, बड़ा रँगीन, है ये शहर कहते हैं
यहाँ पर हैं हज़ारों घर, घरों में लोग रहते हैं
मुझे इस शहर की गलियों का बंजारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा...
मैं इस दुनिया को अक्सर देखकर हैरान होता हूँ
न मुझसे बन सका छोटा सा घर, दिन रात रोता हूँ
खुदाया तूने कैसे ये जहां सारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा...
मेरे मालिक, मेरा दिल क्यूँ तड़पता है, सुलगता है
तेरी मर्ज़ी, तेरी मर्ज़ी पे किसका ज़ोर चलता है
किसी को गुल, किसी को तूने अंगारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा...
यही आग़ाज़ था मेरा, यही अंजाम होना था
मुझे बरबाद होना था, मुझे नाकाम होना था
मेरी तक़दीर ने मुझको, तक़दीर का मारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा...
Music By: अनु मालिक
Lyrics By: आनंद बक्षी
Performed By: गुलाम अली
चमकते चाँद को टूटा हुआ तारा बना डाला
मेरी आवारगी ने मुझको आवारा बना डाला
बड़ा दिलकश, बड़ा रँगीन, है ये शहर कहते हैं
यहाँ पर हैं हज़ारों घर, घरों में लोग रहते हैं
मुझे इस शहर की गलियों का बंजारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा...
मैं इस दुनिया को अक्सर देखकर हैरान होता हूँ
न मुझसे बन सका छोटा सा घर, दिन रात रोता हूँ
खुदाया तूने कैसे ये जहां सारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा...
मेरे मालिक, मेरा दिल क्यूँ तड़पता है, सुलगता है
तेरी मर्ज़ी, तेरी मर्ज़ी पे किसका ज़ोर चलता है
किसी को गुल, किसी को तूने अंगारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा...
यही आग़ाज़ था मेरा, यही अंजाम होना था
मुझे बरबाद होना था, मुझे नाकाम होना था
मेरी तक़दीर ने मुझको, तक़दीर का मारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा...
Share:
शुक्रवार, 16 अगस्त 2013
हम तेरे शहर में आए हैं - Hum Tere Sheher Mein Aaye Hain (Ghulam Ali)
Lyrics By: कैसर उल जाफ़रीPerformed By: गुलाम अली
हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह
सिर्फ़ इक बार मुलाक़ात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में...
मेरी मंजिल है, कहाँ मेरा ठिकाना है कहाँ
सुबह तक तुझसे बिछड़ कर मुझे जाना है कहाँ
सोचने के लिए इक रात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में...
अपनी आंखों में छुपा रक्खे हैं जुगनू मैंने
अपनी पलकों पे सजा रक्खे हैं आंसू मैंने
मेरी आंखों को भी बरसात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में...
आज की रात मेरा दर्द-ऐ-मोहब्बत सुन ले
कंप-कंपाते हुए होठों की शिकायत सुन ले
आज इज़हार-ऐ-खयालात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में...
भूलना ही था तो ये इकरार किया ही क्यूँ था
बेवफा तुने मुझे प्यार किया ही क्यूँ था
सिर्फ़ दो चार सवालात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में...
हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह
सिर्फ़ इक बार मुलाक़ात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में...
मेरी मंजिल है, कहाँ मेरा ठिकाना है कहाँ
सुबह तक तुझसे बिछड़ कर मुझे जाना है कहाँ
सोचने के लिए इक रात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में...
अपनी आंखों में छुपा रक्खे हैं जुगनू मैंने
अपनी पलकों पे सजा रक्खे हैं आंसू मैंने
मेरी आंखों को भी बरसात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में...
आज की रात मेरा दर्द-ऐ-मोहब्बत सुन ले
कंप-कंपाते हुए होठों की शिकायत सुन ले
आज इज़हार-ऐ-खयालात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में...
भूलना ही था तो ये इकरार किया ही क्यूँ था
बेवफा तुने मुझे प्यार किया ही क्यूँ था
सिर्फ़ दो चार सवालात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में...
Share:
गुरुवार, 15 अगस्त 2013
दयार-ए-दिल की रात में - Dayar-e-Dil Ki Raat Mein (Ghulam Ali, Asha Bhosle)
Movie/Album: मेराज-ए-गज़ल (1983)
Music By: गुलाम अली
Lyrics By: नासिर काज़मी
Performed By: गुलाम अली, आशा भोंसले
दयार-ए-दिल की रात में चराग़ सा जला गया
मिला नहीं तो क्या हुआ, वो शक़्ल तो दिखा गया
वो दोस्ती तो ख़ैर अब नसीब-ए-दुश्मनाँ हुई
वो छोटी छोटी रंजिशों का लुत्फ़ भी चला गया
दयार-ए-दिल की...
जुदाइयों के ज़ख़्म, दर्द-ए-ज़िन्दगी ने भर दिये
तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया
दयार-ए-दिल की...
ये सुबहो की सफ़ेदियाँ ये दोपहर की ज़र्दियाँ
अब आईने में देखता हूँ मैं कहाँ चला गया
दयार-ए-दिल की...
ये किस ख़ुशी की रेत पर ग़मों को नींद आ गई
वो लहर किस तरफ़ गई ये मैं कहाँ चला गया
दयार-ए-दिल की...
पुकारती हैं फ़ुर्सतें कहाँ गईं वो सोहबतें
ज़मीं निगल गई उन्हें या आसमान खा गया
दयार-ए-दिल की...
गए दिनों की लाश पर पड़े रहोगे कब तलक
अलम्कशो उठो कि आफ़ताब सर पे आ गया
दयार-ए-दिल की...
Music By: गुलाम अली
Lyrics By: नासिर काज़मी
Performed By: गुलाम अली, आशा भोंसले
दयार-ए-दिल की रात में चराग़ सा जला गया
मिला नहीं तो क्या हुआ, वो शक़्ल तो दिखा गया
वो दोस्ती तो ख़ैर अब नसीब-ए-दुश्मनाँ हुई
वो छोटी छोटी रंजिशों का लुत्फ़ भी चला गया
दयार-ए-दिल की...
जुदाइयों के ज़ख़्म, दर्द-ए-ज़िन्दगी ने भर दिये
तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया
दयार-ए-दिल की...
ये सुबहो की सफ़ेदियाँ ये दोपहर की ज़र्दियाँ
अब आईने में देखता हूँ मैं कहाँ चला गया
दयार-ए-दिल की...
ये किस ख़ुशी की रेत पर ग़मों को नींद आ गई
वो लहर किस तरफ़ गई ये मैं कहाँ चला गया
दयार-ए-दिल की...
पुकारती हैं फ़ुर्सतें कहाँ गईं वो सोहबतें
ज़मीं निगल गई उन्हें या आसमान खा गया
दयार-ए-दिल की...
गए दिनों की लाश पर पड़े रहोगे कब तलक
अलम्कशो उठो कि आफ़ताब सर पे आ गया
दयार-ए-दिल की...
Share:
Labels:
1983,
Asha Bhonsle,
Asha Bhosle,
D,
Ghazal,
Ghulam Ali,
Meraz-e-Ghazal,
Nasir Kazmi
बुधवार, 14 अगस्त 2013
ज़ख्म-ए-तन्हाई में - Zakhm-e-Tanhai Mein (Ghulam Ali)
Lyrics By: मुज़फ्फर वारसी
Performed By: गुलाम अली
ज़ख्म-ए-तन्हाई में खुश्बू-ए-हिना किसकी थी
साया दिवार पे मेरा था, सदा किसकी थी
आंसुओं से ही सही भर गया दामन मेरा
हाथ तो मैंने उठाये थे, दुआ किसकी थी
साया दीवार पे...
मेरी आहों की ज़बां कोई समझता कैसे
ज़िन्दगी इतनी दुखी मेरे सिवा किसकी थी
साया दीवार पे...
छोड़ दी किसके लिए तूने 'मुज़फ्फर' दुनिया
जुस्तजू सी तुझे हर वक्त बता किसकी थी
साया दीवार पे...
आगे (रिकॉर्डिंग में नहीं है पर गज़ल में है):
उसकी रफ़्तार से लिपटी रहती मेरी आँखें
उसने मुड़ कर भी ना देखा कि वफ़ा किसकी थी
वक्त की तरह दबे पाँव ये कौन आया
मैं अँधेरा जिसे समझा वो काबा किसकी थी
आग से दोस्ती उसकी थी जला घर मेरा
दी गयी किसको सजा और खता किसकी थी
मैंने बिनाइयां बो कर भी अँधेरे काटे
किसके बस में थी ज़मीं अब्र-ओ-हवा किसकी थी
Performed By: गुलाम अली
ज़ख्म-ए-तन्हाई में खुश्बू-ए-हिना किसकी थी
साया दिवार पे मेरा था, सदा किसकी थी
आंसुओं से ही सही भर गया दामन मेरा
हाथ तो मैंने उठाये थे, दुआ किसकी थी
साया दीवार पे...
मेरी आहों की ज़बां कोई समझता कैसे
ज़िन्दगी इतनी दुखी मेरे सिवा किसकी थी
साया दीवार पे...
छोड़ दी किसके लिए तूने 'मुज़फ्फर' दुनिया
जुस्तजू सी तुझे हर वक्त बता किसकी थी
साया दीवार पे...
आगे (रिकॉर्डिंग में नहीं है पर गज़ल में है):
उसकी रफ़्तार से लिपटी रहती मेरी आँखें
उसने मुड़ कर भी ना देखा कि वफ़ा किसकी थी
वक्त की तरह दबे पाँव ये कौन आया
मैं अँधेरा जिसे समझा वो काबा किसकी थी
आग से दोस्ती उसकी थी जला घर मेरा
दी गयी किसको सजा और खता किसकी थी
मैंने बिनाइयां बो कर भी अँधेरे काटे
किसके बस में थी ज़मीं अब्र-ओ-हवा किसकी थी
Share:
मंगलवार, 13 अगस्त 2013
वो कभी मिल जाएँ तो - Wo Kabhi Mil Jaaein To (Ghulam Ali)
Lyrics By: अख्तर शीरानी
Performed By: गुलाम अली
वो कभी मिल जाएँ तो क्या कीजिए
रात दिन सूरत को देखा कीजिए
चाँदनी रातों में इक-इक फूल को
बे-ख़ुदी कहती है सजदा कीजिए
वो कभी मिल जाएँ...
जो तमन्ना बर न आए उम्र भर
उम्र भर उस की तमन्ना कीजिए
वो कभी मिल जाएँ...
इश्क़ की रंगीनियों में डूब कर
चाँदनी रातों में रोया कीजिए
वो कभी मिल जाएँ...
पूछ बैठे हैं हमारा हाल वो
बे-ख़ुदी तू ही बता क्या कीजिए
वो कभी मिल जाएँ...
हम ही उस के इश्क़ के क़ाबिल न थे
क्यूँ किसी ज़ालिम का शिकवा कीजिए
वो कभी मिल जाएँ...
आगे (गाने में नहीं है):
आप ही ने दर्द-ए-दिल बख़्शा हमें
आप ही इस का मुदावा कीजिए
वो कभी मिल जाएँ...
कहते हैं 'अख़्तर' वो सुन कर मेरे शेर
इस तरह हमको न रुसवा कीजिए
वो कभी मिल जाएँ...
Performed By: गुलाम अली
वो कभी मिल जाएँ तो क्या कीजिए
रात दिन सूरत को देखा कीजिए
चाँदनी रातों में इक-इक फूल को
बे-ख़ुदी कहती है सजदा कीजिए
वो कभी मिल जाएँ...
जो तमन्ना बर न आए उम्र भर
उम्र भर उस की तमन्ना कीजिए
वो कभी मिल जाएँ...
इश्क़ की रंगीनियों में डूब कर
चाँदनी रातों में रोया कीजिए
वो कभी मिल जाएँ...
पूछ बैठे हैं हमारा हाल वो
बे-ख़ुदी तू ही बता क्या कीजिए
वो कभी मिल जाएँ...
हम ही उस के इश्क़ के क़ाबिल न थे
क्यूँ किसी ज़ालिम का शिकवा कीजिए
वो कभी मिल जाएँ...
आगे (गाने में नहीं है):
आप ही ने दर्द-ए-दिल बख़्शा हमें
आप ही इस का मुदावा कीजिए
वो कभी मिल जाएँ...
कहते हैं 'अख़्तर' वो सुन कर मेरे शेर
इस तरह हमको न रुसवा कीजिए
वो कभी मिल जाएँ...
Share:
मंगलवार, 6 अगस्त 2013
Har Zulm Tera Yaad Hai Lyrics Translation [Sajjad Ali]
Music and Singer: Sajjad Ali
Lyrics: Aftab Muztar
Har Zulm tera yaad hai, bhoola to naheen hoon
Aye vaada faramosh, main tujh sa to naheen hoon
I remember every cruelty of your, I've not forgotten it..
O promise forgetter, I am not like you at least..
Saahil pay khaDay ho tumhein kya gham, chalay jaana
Main doob rahaa hoon, abhi dooba to nahi hoon
You're standing on the shore, what's your problem, go [in some time, when I'm gone]
I'm drowning, but haven't drowned as yet..
Chupchaap sahi maslehatan, waqt kay hathon
Majboor sahi, waqt se haara to nahee hoon
Silently, slowly though I have been reformed by the hands of time,
Though I am compelled, I am not lost to the time..
[that is, I still am fighting the time as much as I can, despite being forced some changes.]
Muztar kyon mujhay dekhta rehta hai zamaana
Deewaana sahi, un ka tamaasha to nahin hoon
Muztar [That's the poet's pen-name, takhallus], why does the world keep on watching me,
I may be mad, but I am not a drama for them to see..
Aye waada faramosh, main tujh sa to naheen hoon
Her Zulm tera yaad hai, bhoola to naheen hoon
O promise forgetter, I am not like you..
I remember every cruelty of your, I've not forgotten it..
Words with Meanings Explained:
Muztar
Takhallus
Share:
Lyrics: Aftab Muztar
Har Zulm tera yaad hai, bhoola to naheen hoon
Aye vaada faramosh, main tujh sa to naheen hoon
I remember every cruelty of your, I've not forgotten it..
O promise forgetter, I am not like you at least..
Saahil pay khaDay ho tumhein kya gham, chalay jaana
Main doob rahaa hoon, abhi dooba to nahi hoon
You're standing on the shore, what's your problem, go [in some time, when I'm gone]
I'm drowning, but haven't drowned as yet..
Chupchaap sahi maslehatan, waqt kay hathon
Majboor sahi, waqt se haara to nahee hoon
Silently, slowly though I have been reformed by the hands of time,
Though I am compelled, I am not lost to the time..
[that is, I still am fighting the time as much as I can, despite being forced some changes.]
Muztar kyon mujhay dekhta rehta hai zamaana
Deewaana sahi, un ka tamaasha to nahin hoon
Muztar [That's the poet's pen-name, takhallus], why does the world keep on watching me,
I may be mad, but I am not a drama for them to see..
Aye waada faramosh, main tujh sa to naheen hoon
Her Zulm tera yaad hai, bhoola to naheen hoon
O promise forgetter, I am not like you..
I remember every cruelty of your, I've not forgotten it..
Words with Meanings Explained:
Muztar
Takhallus
Share:
Labels:
Aftab Muztar,
English Translation,
Ghazal,
Lyrics,
Pakistan,
Sajjad Ali
शुक्रवार, 2 अगस्त 2013
Ek Ghadi Lyrics Translation [D-Day]
Movie: D-Day
Music: Shankar Ehsaan Loy
Lyrics: Niranjan Iyenger
Singer: Rekha Bhardwaj
'Ek Ghadi' is a ghazal sung beautifully by Rekha Bhardwaj, in which the singer is reasoning with her beloved to stay another moment and not to leave yet.
Ek ghadi aur Theher ke jaan baaqi hai
Tere lab pe mere hone ka nishaan baaqi hai
Wait another moment, as there is life still remaining
Your lips still have the mark of my being there
Shab ke chehre pe chardha rang savere ka to kya
dhalte khwaabon mein abhi apna jahaan baaqi hai
So what if the color of morning has risen on evening’s face?
In setting dreams, our world is still remaining
Yoon bichhad ke mujh se na sazaa de khud ko
Abhi haathon se tere jurm-o-gunaah baaqi hai
Separating from me like this, don’t punish yourself
There are still crimes and sins left (to be committed) by your hands
Khilte phoolon ka fasaana to bas bahaana tha
Bujhte sholon ka dastaan baaqi hai
The story of blossoming flowers was just an excuse
The story of dying flames is still remaining
Aankhen sooni hain, meri maang ujdi hai to kya
Abhi haathon mein mere rang-e-henna baaqi hai
So what if my eyes are desolate.. and the parting of my hair disheveled?
The color of henna is still there is my hands..
Share:
Music: Shankar Ehsaan Loy
Lyrics: Niranjan Iyenger
Singer: Rekha Bhardwaj
'Ek Ghadi' is a ghazal sung beautifully by Rekha Bhardwaj, in which the singer is reasoning with her beloved to stay another moment and not to leave yet.
Ek ghadi aur Theher ke jaan baaqi hai
Tere lab pe mere hone ka nishaan baaqi hai
Wait another moment, as there is life still remaining
Your lips still have the mark of my being there
Shab ke chehre pe chardha rang savere ka to kya
dhalte khwaabon mein abhi apna jahaan baaqi hai
So what if the color of morning has risen on evening’s face?
In setting dreams, our world is still remaining
Yoon bichhad ke mujh se na sazaa de khud ko
Abhi haathon se tere jurm-o-gunaah baaqi hai
Separating from me like this, don’t punish yourself
There are still crimes and sins left (to be committed) by your hands
Khilte phoolon ka fasaana to bas bahaana tha
Bujhte sholon ka dastaan baaqi hai
The story of blossoming flowers was just an excuse
The story of dying flames is still remaining
Aankhen sooni hain, meri maang ujdi hai to kya
Abhi haathon mein mere rang-e-henna baaqi hai
So what if my eyes are desolate.. and the parting of my hair disheveled?
The color of henna is still there is my hands..
Share:
गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012
एक पुराना मौसम लौटा - Ek Purana Mausam Lauta (Jagjit Singh)
Movie/Album: मरासिम (1999)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: गुलज़ार
Performed By: जगजीत सिंह
एक पुराना मौसम लौटा
याद भरी पुरवाई भी
ऐसा तो कम ही होता है
वो भी हो तनहाई भी
यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं
कितनी सौंधी लगती है तब माज़ी की रुसवाई भी
ऐसा तो कम...
दो-दो शक़्लें दिखती हैं इस बहके से आईने में
मेरे साथ चला आया है आप का इक सौदाई भी
ऐसा तो कम...
ख़ामोशी का हासिल भी इक लम्बी सी ख़ामोशी है
उनकी बात सुनी भी हमने अपनी बात सुनाई भी
ऐसा तो कम...
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: गुलज़ार
Performed By: जगजीत सिंह
एक पुराना मौसम लौटा
याद भरी पुरवाई भी
ऐसा तो कम ही होता है
वो भी हो तनहाई भी
यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं
कितनी सौंधी लगती है तब माज़ी की रुसवाई भी
ऐसा तो कम...
दो-दो शक़्लें दिखती हैं इस बहके से आईने में
मेरे साथ चला आया है आप का इक सौदाई भी
ऐसा तो कम...
ख़ामोशी का हासिल भी इक लम्बी सी ख़ामोशी है
उनकी बात सुनी भी हमने अपनी बात सुनाई भी
ऐसा तो कम...
Share:
रविवार, 22 जनवरी 2012
जो चाहते हो सो कहते हो - Jo Chahte Ho So Kehte Ho (Mehdi Hassan)
Music By: मेहदी हसन (नट भैरव)
Lyrics By: रज़ा
Performed By: मेहदी हसन
जो चाहते हो, सो कहते हो
चुप रहने की लज्ज़त क्या जानो
ये राज़-ए-मुहब्बत है प्यारे
तुम राज़-ए-मुहब्बत क्या जानो
अलफ़ाज़ कहाँ से लाऊँ मैं
छाले की टपक समझाने को
इज़हार-ए-मुहब्बत करते हो
एहसास-ए-मुहब्बत क्या जानो
ये राज़-ए-मुहब्बत है...
क्या हुस्न की भीख भी होती है
जब चुटकी-चुटकी जुडती है
हम अहल-ए-गरज़ जाने इसको
तुम साहिब दौलत क्या जानो
ये राज़-ए-मुहब्बत है...
है फर्क बड़ा ऐ जान-ए-रज़ा
दिल देने में, दिल लेने में
उल्फत का तआल्लुक जानके भी
रिश्ते की नज़ाकत क्या जानो
ये राज़-ए-मुहब्बत है...
Lyrics By: रज़ा
Performed By: मेहदी हसन
जो चाहते हो, सो कहते हो
चुप रहने की लज्ज़त क्या जानो
ये राज़-ए-मुहब्बत है प्यारे
तुम राज़-ए-मुहब्बत क्या जानो
अलफ़ाज़ कहाँ से लाऊँ मैं
छाले की टपक समझाने को
इज़हार-ए-मुहब्बत करते हो
एहसास-ए-मुहब्बत क्या जानो
ये राज़-ए-मुहब्बत है...
क्या हुस्न की भीख भी होती है
जब चुटकी-चुटकी जुडती है
हम अहल-ए-गरज़ जाने इसको
तुम साहिब दौलत क्या जानो
ये राज़-ए-मुहब्बत है...
है फर्क बड़ा ऐ जान-ए-रज़ा
दिल देने में, दिल लेने में
उल्फत का तआल्लुक जानके भी
रिश्ते की नज़ाकत क्या जानो
ये राज़-ए-मुहब्बत है...
Share:
शनिवार, 21 जनवरी 2012
पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा - Patta Patta Boota Boota (Mehdi Hassan)
Music By: निआज़ हुसैन शमी
Lyrics By: मीर तकी मीर
Performed By: मेहदी हसन
पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा, हाल हमारा जाने है
जाने ना, जाने, गुल ही न जाने
बाग़ तो सारा जाने है
चारागरी बीमारी-ए-दिल की रस्म-ए-शहर-ए-हुस्न नहीं
वरना दिलबर-ए-नादाँ भी इस दर्द का चारा जाने है
मेहर-ओ-वफ़ा-ओ-लुत्फ़-ओ-इनायत, एक से वाक़िफ़ इनमें नहीं
और तो सब कुछ तंज़-ओ-किनाया रम्ज़-ओ-इशारा जाने है
हाल हमारा...
Lyrics By: मीर तकी मीर
Performed By: मेहदी हसन
पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा, हाल हमारा जाने है
जाने ना, जाने, गुल ही न जाने
बाग़ तो सारा जाने है
चारागरी बीमारी-ए-दिल की रस्म-ए-शहर-ए-हुस्न नहीं
वरना दिलबर-ए-नादाँ भी इस दर्द का चारा जाने है
हाल हमारा...
और तो सब कुछ तंज़-ओ-किनाया रम्ज़-ओ-इशारा जाने है
हाल हमारा...
Share:
Labels:
Ghazal,
Mehdi Hasan,
Mehdi Hassan,
Mir Taqi Mir,
Niyaz Hussain Shami,
P
सदस्यता लें
संदेश (Atom)